धारदार हथियार की फोटो, चीनी सेना ने भारतीय जवानों पर हमला करने के लिए किया था

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एक धारदार हथियार की फोटो। बताया जा रहा है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर हमला करने के लिए इसी का इस्तेमाल किया है। पहली नजर में यह हथियार वाला दावा फेक लगता है। 

  • रक्षा विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने 18 जून को यह तस्वीर ट्वीट की।
  • 1996 में भारत-चीन के बीच बंदूक और बिस्फोटक जैसे खतरनाक हथियार इस्तेमाल न करने को लेकर संधि हुई थी। यही वजह है कि 45 साल से सैनिकों के बीच झड़पें तो होती रहीं। लेकिन, हथियार इस्तेमाल नहीं हुए। ऐसे में 15 जून को भारतीय जवानों के शहीद होने की खबर ने पूरे देश को शोकाकुल करने के साथ ही चौंका भी दिया। ये संधि ही है, जो इस धारदार हथियार की फोटो पर विश्वास न करने के लिए लोगों को मजबूर कर रही थी। 
  • ये फोटो किसी अज्ञात यूजर ने सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की है। जैसी कि अमूमन भ्रामक खबरों के साथ होता है। बल्कि बीबीसी वर्ल्ड को खुद चीनी सीमा पर तैनात एक भारतीय सेना के अफसर ने ही इसे भेजा है। यह पुष्टि भी की है कि इसका इस्तेमाल चीनी अधिकारियों ने भारतीय जवानों पर हमले के लिए किया है। बीबीसी वर्ल्ड पर पूरी खबर यहां पढ़ सकते हैं : https://www.bbc.com/news/world-asia-india-53089037

हथियार की वायरल हो रही तस्वीर भ्रामक नहीं है। बल्कि असल में चीनी सेना ने इसका इस्तेमाल भारतीय जवानों पर हमले के लिए किया है। 

चाइनीज ऐप बैन का कोई आदेश जारी नहीं हुआ

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने सभी चाइनीज ऐप्स को देश से बैन कर दिया है। दावे के साथ भारत सरकार के नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर के नाम से एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है। वायरल आदेश में दिख रहा है कि गूगल इंडिया और एप्पल इंडिया को केंद्र सरकार ने अपने प्लेटफॉर्म से चाइनीज ऐप हटाने का आदेश दिया है। 

  • चूंकि दावा ऐप से जुड़ा हुआ है। इसलिए हमने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का ट्विटर हैंडल चेक किया। जहां ऐसा कोई भी अपडेट नहीं था। 
  • भारत सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने ही इस आदेश की कॉपी को फर्जी बताया है। इससे स्पष्ट होता है कि वायरल हो रहा आदेश सरकार की तरफ से जारी नहीं किया गया।  

भारत सरकार ने चाइनीज ऐप को देश में बैन करने से जुड़ा कोई आदेश अब तक जारी नहीं किया है। सरकार ने खुद ही सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को फर्जी बताया है।

चीन के कब्जे में थे हमारे जवान

लद्दाख के गलवान में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में शुक्रवार को नई बात सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की सेना ने भारत के 10 जवानों को बंधक बना लिया था। गुरुवार को बातचीत के बाद इन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि, इस पर सेना का आधिकारिक बयान नहीं आया है। उधर, चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि हमने किसी भारतीय सैनिक को बंधक नहीं बनाया।

गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए। इनमें यूनिट का कमांडिंग अफसर भी शामिल है। यह अफसर उसी चीनी यूनिट का था, जिसने भारतीय जवानों के साथ हिंसक झड़प की।

सेना ने कहा था- गलवान में 76 जवान घायल हुए थे 
गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में हुई झड़प में घायल कोई भी भारतीय जवान गंभीर नहीं है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सेना के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि 18 जवान लेह और 58 सैनिक दूसरे अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से सभी की स्थिति अब स्थिर है। सूत्रों ने कहा कि लेह के 18 जवान 15 दिन में ड्यूटी पर आ जाएंगे। अन्य अस्पतालों में भर्ती जवानों को ड्यूटी पर लौटने में महज एक हफ्ते का वक्त लगेगा। उधर, सेना ने यह भी कहा था कि कोई भी जवान लापता नहीं है।

दोनों पक्षों के मेजर जनरलों के बीच लगातार तीन दिन बैठक हुईं
चीन और भारत के मेजर जनरल ने गलवान विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बैठक की। यह मीटिंग करीब 6 घंटे तक चली। यह बैठक गलवान घाटी के करीब ही हुई है। इसमें किस मुद्दे पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई। इससे पहले बुधवार को हुई बातचीत में भी दोनों देशों के अफसरों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। मंगलवार को भी झड़प को लेकर बातचीत हुई थी।

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